महत्वपूर्ण कार्यकलापों और अध्ययनों की समीक्षा 1969-70

Abstract

चौथी पंचवर्षीय योजना (1969–74) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया व्यापक परामर्श, संसदीय समीक्षा तथा केन्द्र–राज्य समन्वय के माध्यम से सम्पन्न हुई। योजना का प्रारूप अप्रैल 1969 में राष्ट्रीय विकास परिषद् के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहाँ इसे सैद्धान्तिक रूप से स्वीकार करते हुए राज्यों के संसाधनों के पुनर्निर्धारण तथा केन्द्र–राज्य वित्तीय दायित्वों की समीक्षा के निर्देश दिए गए। इसके पश्चात योजना प्रारूप पर संसद के दोनों सदनों में विस्तृत बहस हुई तथा संसदीय समितियों और योजना आयोग द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों का विश्लेषण किया गया। योजना आयोग ने पाँचवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्यों के संसाधनों का पुनर्मूल्यांकन किया तथा राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों के साथ क्रमिक विचार-विमर्श किया। इस प्रक्रिया में पिछड़े क्षेत्रों के निर्धारण, औद्योगिक रूप से पिछड़े जिलों के चयन तथा उन्हें वित्तीय रियायतें और केन्द्रीय सहायता प्रदान करने के मापदण्ड विकसित किए गए। साथ ही यह अनुभव किया गया कि कई राज्यों ने अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग गैर-योजना घाटों की पूर्ति में किया, जिससे योजना आयोग ने यह सिफारिश की कि राज्यों को अपने द्वारा जुटाए गए अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग केवल योजना आकार बढ़ाने के लिए करने की अनुमति दी जाए। वित्त मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, वित्तीय संस्थानों तथा विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श के बाद योजना परिव्ययों में आवश्यक समायोजन किए गए। बढ़े हुए संसाधनों को विशेष रूप से कृषि, सिंचाई, बिजली, ग्रामीण विद्युतीकरण, उद्योग और खनन क्षेत्रों में आवंटित किया गया। इन समस्त प्रयासों के परिणामस्वरूप चौथी पंचवर्षीय योजना का परिशोधित ढांचा तैयार हुआ, जिसे जनवरी–फरवरी 1970 में योजना आयोग, मंत्रिमंडल तथा मार्च 1970 में राष्ट्रीय विकास परिषद् द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया।

Description

भारत सरकार योजना आयोग

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Planning Commission - 1969

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