वार्षिक योजना प्रगति प्रतिवेदन 1967-68

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2024-02-12T07:17:13Z
dc.date.available2024-02-12T07:17:13Z
dc.date.issued1967
dc.description.abstractतीसरी पंचवर्षीय योजना के अन्त से अर्थ व्यवस्था पर जो कठिनाई आई थी वह वर्ष 1967-68 के लगभग मध्य भाग तक जारी रही, पर इस वर्ष के उत्तरार्ध में अर्थ व्यवस्था में मोड़ आया । देश के लगभग सभी भागों में मौसम अच्छा रहा और इसके साथ हो अधिक उपज देने वालो किस्मों के कार्यक्रम के अन्तर्गत गेहूं की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई जिससे अन्न का उत्पादन बढ़ गया । वाणिज्यिक फसलों के उत्पादन में भी महत्वपूर्ण वृद्धि हुई । वर्ष के उत्तरार्ध में औद्योगिक उत्पादन में भी थोड़ा सा सुधार हुआ । कृषि के लिए निवेश नामन्त्री तैयार करने वाले उद्योगों के उत्पादन में वृद्धि जारी रही और नई फसलों से कच्चे माल को अच्छी उपलब्धि होने पर कृषि आधारित उद्योगों के उत्पादन में भी सुधार हुआ । टिकाऊ उपभोक्ता सामग्री तैयार करने वाले कुछ उद्योगों के उत्पादन में भी सुधार हुआ पर पुजीगत माल तैयार करने वाले उद्योगों का उत्पादन कम बना रहा । श्रौद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर में 1964-65 में जो घटती की प्रवृत्ति दिखाई दी थी वह रुक गई और 1967-68 में वृद्धि की दर 1966-67 की अपेक्षा थोड़ी सी अधिक हुई ।
dc.identifier.citationPlanning Commission - 1967
dc.identifier.issn77743
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211/handle/123456789/3441
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/77743/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesC-3349
dc.titleवार्षिक योजना प्रगति प्रतिवेदन 1967-68
dc.title.alternativeभारत सरकार योजना आयोग
dc.typeBook

Files

Original bundle

Now showing 1 - 1 of 1
Loading...
Thumbnail Image
Name:
वार्षिक_योजना_प्रगति_प्रतिवेदन_1967-68.pdf
Size:
4.93 MB
Format:
Adobe Portable Document Format

Collections