16 जनवरी, 1997 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय विकास परिषद् की 47वीं बैठक सारांश रिकार्ड

Abstract

प्रस्तुत विवरण राष्ट्रीय विकास परिषद् की 47वीं बैठक की कार्यवाही का समग्र विवेचन करता है, जो 6 जनवरी 1997 को नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री एवं परिषद् के अध्यक्ष श्री एच. डी. देवेगौड़ा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य नौवीं पंचवर्षीय योजना के दृष्टिकोण पत्र के मसौदे पर विचार करना तथा योजना आयोग को योजना के कार्यान्वयन हेतु आवश्यक नीतिगत दिशानिर्देश प्रदान करना था। बैठक में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, मुख्यमंत्रियों तथा अन्य वरिष्ठ महानुभावों ने भाग लिया। योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. मधु दण्डवते ने अपने प्रारम्भिक वक्तव्य में नौवीं योजना के मूल दर्शन के रूप में “समानता के साथ विकास” की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने सहकारी संघवाद, विकेन्द्रीकरण, राज्य सरकारों, पंचायत राज संस्थाओं, स्वैच्छिक संगठनों तथा सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की भागीदारी को योजना निर्माण की प्रमुख विशेषता बताया। कृषि, लघु उद्योग, श्रम-प्रधान क्षेत्रों, घरेलू बचत, सार्वजनिक निवेश तथा 7 प्रतिशत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर को योजना के मुख्य लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में नौवीं योजना को स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती और 21वीं सदी के प्रवेश से जोड़ते हुए इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने गरीबी, बेरोजगारी, क्षेत्रीय असमानता और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए तीव्र एवं समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया। अवस्थापना विकास, कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मानव संसाधन विकास तथा सामाजिक क्षेत्र में निवेश को समानतावादी विकास का आधार माना गया।

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भारत सरकार योजना आयोग

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Planning Commission - 1997

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