वार्षिक रिपोर्ट 1994-95

Loading...
Thumbnail Image

Date

Journal Title

Journal ISSN

Volume Title

Publisher

योजना आयोग

Abstract

जुलाई 1991 से आरम्भ किए गए स्थिरीकरण एवं ढांचागत समायोजन उपाय भारतीय अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक मोड़ सिद्ध हुए, जिन्हें सामान्यतः आर्थिक सुधारों के नाम से जाना जाता है। स्वतंत्रता के पश्चात् लगभग तीन दशकों तक भारत की आर्थिक नीति सामाजिक न्याय, समानता, क्षेत्रीय संतुलन तथा गरीबी उन्मूलन पर आधारित रही, जिसमें राज्य की प्रमुख भूमिका, व्यापार एवं विनिमय नियंत्रण, औद्योगिक लाइसेंस व्यवस्था तथा वित्तीय क्षेत्र का कड़ा नियमन शामिल था। किंतु 1970 के दशक के बाद यह अनुभव होने लगा कि अत्यधिक नियंत्रण आर्थिक विकास में सहायक होने के बजाय अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं। 1980 के दशक में आंशिक उदारीकरण और विनियमन में ढील के कारण उच्च विकास दर प्राप्त हुई, परंतु यह वृद्धि पर्याप्त मैक्रो-आर्थिक समायोजन के अभाव में अस्थिर रही। 1990–91 में खाड़ी संकट, तेल कीमतों में वृद्धि, बढ़ते भुगतान संतुलन घाटे, विदेशी मुद्रा संकट तथा उच्च मुद्रास्फीति ने अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया। इस पृष्ठभूमि में सरकार ने जुलाई 1991 में स्थिरीकरण और ढांचागत समायोजन कार्यक्रम लागू किए, जिनका उद्देश्य राजकोषीय घाटे में कमी, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, विनिमय दर में सुधार तथा भुगतान संतुलन को सुदृढ़ करना था।

Description

भारत सरकार योजना आयोग

Citation

Planning Commission - 1995

Collections

Endorsement

Review

Supplemented By

Referenced By