योजना आयोग में हिंदी के प्रयोग में हुई प्रगति पर संक्षिप्त टिपण्णी

Abstract

प्रस्तुत विवरण योजना आयोग में राजभाषा हिन्दी के प्रयोग की प्रगति, उसकी आवश्यकता, संगठनात्मक व्यवस्था तथा कार्यान्वयन प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। योजना आयोग का कार्य-क्षेत्र भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों और विभागों से भिन्न, बहुआयामी तथा तकनीकी प्रकृति का है, जहाँ देश के नियोजित और संतुलित विकास की दृष्टि से पंचवर्षीय एवं वार्षिक योजनाओं का निर्माण, कार्यान्वयन, मूल्यांकन तथा निगरानी की जाती है। इन योजनाओं में आर्थिक विकास, कृषि, उद्योग, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, रोजगार, पिछड़े वर्गों का विकास तथा सामाजिक कल्याण जैसे विविध क्षेत्र सम्मिलित होते हैं, जिसके कारण हिन्दी के प्रयोग की आवश्यकताएँ भी विशिष्ट और व्यापक हैं। योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई और प्रारम्भ से ही यह प्रयास किया गया कि योजना संबंधी साहित्य अंग्रेज़ी के साथ-साथ हिन्दी में भी उपलब्ध कराया जाए। पहली पंचवर्षीय योजना से ही हिन्दी में योजना-प्रलेख प्रकाशित किए जाने लगे तथा 1952 में हिन्दी अनुभाग की स्थापना की गई। यथा-संशोधित राजभाषा अधिनियम, नियमों और गृह मंत्रालय (राजभाषा विभाग) द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप आयोग में अधिसूचनाएँ, नियम, रिपोर्टें, संसदीय काग़ज़-पत्र, अध्ययन एवं मूल्यांकन रिपोर्टें, पंचवर्षीय तथा वार्षिक योजनाओं के हिन्दी अनुवाद नियमित रूप से तैयार किए जाते हैं। योजना आयोग द्वारा हिन्दी में पत्र-व्यवहार, बैठकों और सम्मेलनों के काग़ज़-पत्र, विभिन्न प्रशासनिक व तकनीकी प्रपत्र, पत्रिका “योजना” का हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं में प्रकाशन तथा पुस्तकालाय में हिन्दी पुस्तकों का समृद्ध संग्रह सुनिश्चित किया गया है। हिन्दी अनुभाग के माध्यम से उच्चस्तरीय तकनीकी अनुवाद, संसदीय प्रश्नोत्तर, राजभाषा नीति का कार्यान्वयन, हिन्दी प्रशिक्षण तथा संदर्भ साहित्य की व्यवस्था की जाती है। साथ ही, कार्यक्रम मूल्यांकन संगठन के क्षेत्रीय और परियोजना कार्यालयों में भी हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित किया गया है।

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भारत सरकार योजना आयोग

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Planning Commission - 1981

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