भारत योजना आयोग चौथी पंचवर्षीय योजना संशोधित परिव्यय 1969-74
| dc.contributor.author | योजना आयोग | |
| dc.date.accessioned | 2026-02-09T09:16:48Z | |
| dc.date.available | 2026-02-09T09:16:48Z | |
| dc.date.issued | 1970 | |
| dc.description | भारत सरकार योजना आयोग | |
| dc.description.abstract | चौथी पंचवर्षीय योजना (1969–74) के संशोधित परिव्यय का निर्माण राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा अप्रैल 1969 में योजना-मसौदे के अनुमोदन तथा पाँचवें वित्त आयोग के पंचाट (अवार्ड) के बाद किया गया। परिषद ने योजना आयोग को निर्देश दिया था कि राज्यों के साधनों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए तथा केन्द्र और राज्यों की पारस्परिक ऋण स्थिति की पुनः समीक्षा की जाए। इस अवधि में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना बड़े वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण रही, जिसने योजना वित्तपोषण की संभावनाओं को व्यापक रूप से प्रभावित किया। योजना आयोग ने पाँचवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आलोक में राज्य सरकारों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर राज्यों की संसाधन स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया। यह स्पष्ट हुआ कि अतिरिक्त साधनों का बड़ा भाग राज्यों के गैर-योजना घाटों में समाहित हो रहा था, जिससे योजना परिव्यय बढ़ाने की उनकी क्षमता सीमित हो रही थी। इस समस्या के समाधान हेतु वित्त मंत्रालय द्वारा विशेष समायोजन की व्यवस्था की गई, जिसके अंतर्गत राज्यों को अतिरिक्त साधन जुटाकर उन्हें सीधे विकास योजनाओं में लगाने की अनुमति दी गई। इसके परिणामस्वरूप राज्यों के योजना साधनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और राज्य योजनाओं का कुल परिव्यय बढ़कर 6606 करोड़ रुपये हो गया। संशोधित योजना में बाजार से ऋण, जीवन बीमा निगम, भविष्य निधि, तथा विभिन्न केन्द्रीय और राज्य वित्तीय संस्थानों की भूमिका में वृद्धि हुई। बैंक राष्ट्रीयकरण के कारण जमा राशि में तीव्र वृद्धि का अनुमान लगाया गया, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र, राज्य उद्यमों और आधारभूत ढांचे के वित्तपोषण को बल मिला। केन्द्रीय क्षेत्र में भी परिव्यय में पर्याप्त वृद्धि की गई, जिसका एक भाग राज्यों के कार्यक्रमों को सहायता देने हेतु निर्धारित किया गया। संघ शासित क्षेत्रों के लिए भी आवंटन बढ़ाया गया। विदेशी सहायता के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों और विदेशी सरकारों से प्राप्त ऋणों में वृद्धि हुई, यद्यपि घाटे की अर्थव्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। कुल मिलाकर, चौथी पंचवर्षीय योजना का संशोधित परिव्यय भारत की योजना प्रक्रिया में वित्तीय पुनर्संरचना, संघ-राज्य समन्वय, और सार्वजनिक क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ, जिसने विकास के लिए संसाधन जुटाने की क्षमता को व्यापक रूप से बढ़ाया। | |
| dc.identifier.citation | Planning Commission - 1970 | |
| dc.identifier.issn | 71507 | |
| dc.identifier.uri | http://10.21.131.211:4000/handle/123456789/6213 | |
| dc.identifier.uri | http://10.21.131.211:8080/eBook/71507/index.html | |
| dc.language.iso | other | |
| dc.publisher | योजना आयोग | |
| dc.relation.ispartofseries | C-6416 | |
| dc.subject | चौथी पंचवर्षीय योजना | |
| dc.subject | संशोधित परिव्यय 1969-74 | |
| dc.subject | योजना आयोग | |
| dc.subject | राष्ट्रीय विकास परिषद | |
| dc.subject | पाँचवाँ वित्त आयोग | |
| dc.subject | राज्य योजना साधन | |
| dc.subject | बैंक राष्ट्रीयकरण | |
| dc.subject | बाजार ऋण | |
| dc.subject | केन्द्रीय सहायता | |
| dc.subject | विदेशी सहायता | |
| dc.subject | सार्वजनिक क्षेत्र निवेश | |
| dc.subject | वित्तीय पुनर्संरचना | |
| dc.title | भारत योजना आयोग चौथी पंचवर्षीय योजना संशोधित परिव्यय 1969-74 | |
| dc.title.alternative | भारत सरकार योजना आयोग | |
| dc.type | Report |
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