सांतवी पंचवर्षीय योजना 1985-90 खण्ड-II

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2024-05-08T09:58:55Z
dc.date.available2024-05-08T09:58:55Z
dc.date.issued1985-10
dc.descriptionभारत सरकार योजना आयोग
dc.description.abstractऋण संबंधी विभिन्न संस्थाओं के कार्यचालन में तथा उनमें समन्वय स्थापित करने की दृष्टि से राज्य स्तर पर सहकारी समितियां पहले ही स्थापित को जा चुकी हैँ। फिर भी ये समितियां विभिन्न संस्थाओं के कार्यचालन में आ्रावश्यक समन्वय स्थापित नहीं कर पाई हूँ । इसके परिणामस्वरूप वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण अधिकतर उन क्षेत्रों में दिए जाने लगे हैँ जहां कि पहले ही सहकारिता की सुदृढ़ व्यवस्था थी | संस्थागत ऋण एजेंसियों के कार्यवालन की इस कमी को सातबीं य्रोजना के दौरान ठीक कर दिया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर ऋण योजनाएं बनानी होंगी। ऐसी आशा की जाती है कि इन योजनाओं से आवश्यक समन्वयात्मक तथा विशेष भूमिकाओं तथा जिस्मेदारियों को निर्धारित करने में सहायता मिलेगी जिनका पालन उस क्षेत्र में चल रही ऋण संबंधी विभिन्न संस्थाओ्रों में होता है।
dc.identifier.citationPlanning Commission - 1985
dc.identifier.issn118308
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211/handle/123456789/4063
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/118308/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesC-4151
dc.titleसांतवी पंचवर्षीय योजना 1985-90 खण्ड-II
dc.title.alternativeभारत सरकार योजना आयोग
dc.typeReport

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