वार्षिक रिपोर्ट 1993-94

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2025-12-24T12:15:00Z
dc.date.available2025-12-24T12:15:00Z
dc.date.issued1994
dc.descriptionभारत सरकार योजना आयोग
dc.description.abstractअर्थव्यवस्था आठवीं पंचवर्षीय योजना के आरम्भिक वर्षों में सुदृढ़ हुई है। वित्तीय संकट पर काबू पा लिया गया है और अब विकास पर ध्यान नेन्द्रित किया गया है। संकट के वर्षों में यह भी महसूस किया गया कि योजना में पुनराभिमुखीकरण की आवश्यकता है। आठवीं योजना में निजी उद्यमशीलता, लोगों की पहल और सहभागिता के विकास पर विशेष बल दिया गया है। आठवीं योजना के दूसरे वर्ष 1993-94 में दीर्घकालीन विकासात्मक मुद्दे, जिन पर निवेश आयोजना और सार्वजनिक नीति की प्रक्रिया के माध्यम से ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है, उन मुद्दों से अधिक स्पष्ट रूप से वताए गए हैं जिन्हें अर्थव्यवस्था में बाजार प्रक्रिया के माध्यम से अमल में लाया जाना चाहिए।
dc.identifier.citationPlanning Commission - 1994
dc.identifier.issnC16767
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:4000/handle/123456789/5876
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/C16767/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesC-5959
dc.subjectआठवीं पंचवर्षीय योजना
dc.subjectवित्तीय संकट
dc.subjectअर्थव्यवस्था और योजना
dc.subjectयोजना प्रगति
dc.subjectराष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र
dc.subjectअनुसन्धान
dc.subjectसंस्थानों
dc.subjectविश्वविद्यालयों
dc.titleवार्षिक रिपोर्ट 1993-94
dc.title.alternativeभारत सरकार योजना आयोग
dc.typeReport

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