वार्षिक योजना 1983-84

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योजना आयोग

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वार्षिक योजना 1983–84, छठी पंचवर्षीय योजना का चौथा वर्ष थी और इसका निर्माण छठी योजना में निर्धारित उद्देश्यों, नीतियों तथा पूर्ववर्ती तीन वर्षों के आर्थिक निष्पादन को ध्यान में रखकर किया गया। इस योजना में छठी योजना के अभिन्न अंग परिशोधित बीस सूत्री कार्यक्रम पर विशेष बल दिया गया, जिसका उद्देश्य उत्पादकता में समग्र सुधार लाना तथा समाज के कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में वृद्धि करना था। योजना का केंद्रबिंदु सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से समावेशी विकास को प्रोत्साहित करना रहा। 1980-81 और 1981-82 में अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ, किंतु 1982-83 में सूखा और बाढ़ जैसी प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण कृषि उत्पादन और औद्योगिक विकास प्रभावित हुआ। इसके बावजूद सकल घरेलू उत्पाद की औसत वृद्धि दर छठी योजना के लक्ष्यों के निकट बनी रही। खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट के बावजूद सिंचाई क्षमता के विस्तार, रबी उत्पादन में वृद्धि और कृषि की लचीली संरचना के कारण स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से खाद्यान्न की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई तथा आवश्यकतानुसार आयात का सहारा लिया गया। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई। कोयला उत्पादन, कच्चे तेल का उत्पादन और तेल शोधन क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई और भुगतान संतुलन की स्थिति को नियंत्रित रखने में सहायता मिली। बिजली उत्पादन में भी वृद्धि हुई, विशेष रूप से तापीय ऊर्जा में, यद्यपि नई क्षमता की स्थापना लक्ष्य से कुछ कम रही। रेल परिवहन में माल यातायात के विस्तार से देश के विभिन्न भागों में वस्तुओं की आपूर्ति सुचारु बनी रही। औद्योगिक क्षेत्र में 1982-83 के दौरान वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही, परंतु उर्वरक, सीमेंट, चीनी, परिवहन उपकरण और मशीनरी जैसे प्रमुख उद्योगों में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। समग्र रूप से वार्षिक योजना 1983-84 ने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, कमजोर वर्गों के संरक्षण और आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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भारत सरकार योजना आयोग

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Planning Commission - 1984

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