कृषि योग्य क्षेत्र के लिए भूमि संरक्षण कार्यक्रम का अध्ययन

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2023-11-08T10:38:32Z
dc.date.available2023-11-08T10:38:32Z
dc.date.issued1962
dc.description.abstractमिट्टी में नमी के साथ कृषि उत्पादन के कुछ भौतिक तत्व होते है | किसी भी भू -क्षेत्र से मात्रा गुण और होने वाले आर्थिक लाभ बहुत कुछ उस भूमि की ऊपरी तह की प्रकृति और विशेषताओं पर निर्भर करते है | पर्याप्त गहराई तक उस मिट्टी के प्राकृतिक निर्माण में लगभग सौ वर्ष या इससे अधिक समय लगता है | मिट्टी की इस मूल्यवान ऊपरी तह के समाप्त हो जाने के फलस्वरूप उस भू -क्षेत्र की गुणात्मकता में कमी यहां तक आ जाती है कि उसके उपयोग करने की पध्दति में पूर्णतया परिवर्तन हो जाता है और वह भू -क्षेत्र बहुत कम उपजाऊ हो जाता है | मिट्टी की ऊपरी तह की समाप्ति की यह प्रकिया बहुत ही धीमी और कमश : होती है जिसे किसान गलत प्रयोग या अज्ञानता के करण तीव्र क्र देते है या पशुपालन के दोषपूर्ण तरीकों से प्रकृति चक में बाधा उपस्थित कर देते है और उसके विनाशी तत्व को बढ़ा देते है
dc.identifier.citationPlanning Commission - 1962
dc.identifier.issnFlipbook_000163
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211/handle/123456789/181
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/Flipbook_000163/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesD-4-90-C-214; D-4-90
dc.titleकृषि योग्य क्षेत्र के लिए भूमि संरक्षण कार्यक्रम का अध्ययन
dc.title.alternativeProgramme Evaluation Organisation Planning Commission Government of India
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कृषि_योग्य_क्षेत्र_के_लिए_भूमि_संरक्षण_कार्यक्रम_का_अध्ययन.pdf
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